कलम में स्याही

नि:शब्द हूँ निस्तेज मैं
मस्तिष्क के आवेश में
शब्द भारी पड़ रहे
कलम की स्याही से
नित यह कह रहे
ना उल्लिखित कर पाऊँगा
मैं तेरे भाव को
ना प्रकट मैं कर पाऊँगा
तो मैं क्यूँ लिखूं
मैं क्यूँ रखूँ अब
अपने कलम में स्याही??

Comments

9 responses to “कलम में स्याही”

  1. बहुत अच्छे शब्द

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

    1. Pragya Shukla

      धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर पंक्तियां

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