कलम से

प्यार के चक्कर में पड़
मेरी तरह प्यारे,
अरे तू भी वियोगी कवि
न बन जाना कहीं प्यारे।
जरूरत है नए उत्साह की
कविता लिखे कोई,
इस कमी को कलम से आज,
पूरी कर मेरे प्यारे।

— डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत

Comments

6 responses to “कलम से”

  1. MS Lohaghat

    अच्छी है

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

  2. कलम पर उत्तम विचार

    1. Satish Pandey

      👏

      1. Abhishek kumar

        👍

  3. वियोगी होगा पहला कवि

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