कल्पना और हकीक़त

कल्पना की दुनियां,
बहुत ख़ूबसूरत
हकीक़त इससे कहीं तो जुदा है
कभी मेल खाती, कभी दूर जाती
हकीक़त की दुनियां है,
कल्पना सी कहां है ..

*****✍️गीता

Comments

7 responses to “कल्पना और हकीक़त”

  1. बिल्कुल सही कहा आपने

    1. धन्यवाद प्रज्ञा

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏 बहुत बहुत आभार

  2. वाह, कवि गीता जी की बेहतरीन अभिव्यक्ति। भाषा और शिल्प दोनों की दृष्टि से अति उत्तम

    1. Geeta kumari

      कविता की सुंदर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी
      इन प्रेरक पंक्तियों से मेरा उत्साह वर्धन हुआ है , धन्यवाद सर..

  3. सुन्दर रचना

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