8 Comments

  1. आजकल के माहौल के अनुसार बहुत ही सटीक चित्रण किया गया है कविता में । इंसान है पर इंसानियत नहीं रही, बहुत सुंदर रचना

  2. “इन तथाकथित इन्सानों में
    इन्सान नहीं मिल पाया है
    हर मन्दिर को पूजा हमने
    भगवान नहीँ मिल पाया है।’
    ————– आपकी यह कविता बहुत उच्चस्तरीय है प्रभात सर। सच्चाई को मौन रहकर नहीं बल्कि मुखर होकर ही सामने लाया जा सकता है। कविता की विशेषता यह है कि कवि की दृष्टि इंसान के व्यवहारिक पक्ष की उन छोटी से छोटी बातों पर गई है, जिसे लोग सामान्यतया नजरअंदाज कर जाते हैं। आज इंसान इंसान के बीच से संवेदनाएँ गायब होती जा रही हैं। जिसका आपने सुन्दर चित्रण किया है।

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