4 Comments

  1. लोकतन्त्र के नाम पर
    बदले सिर्फ सवार हैं ||
    _________लोकतांत्रिक सिस्टम पर तंज भी है और यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया हैआपने अपनी कविता में, बहुत खूब

  2. बहुत ही खूबसूरत तंज कसा है आपने व्यंग्यात्मक शैली का प्रयोग बहुत ही लाजवाब है

  3. राज है सिर्फ अंधेरों का
    उजालों को वनवास है
    यहाँ तो गांधी के सपनों का
    उड़ता नित्य उपहास है ||
    —— कमाल की पंक्तियां, उच्चस्तरीय अभिव्यक्ति, वाह

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