चिंता त्याग प्रसन्नचित रह
कविता तेरे साथ खड़ी,
पूरी साथ न भी दे पाए
तो भी ताकत बनी खड़ी।
कविता तेरे साथ खड़ी
Comments
13 responses to “कविता तेरे साथ खड़ी”
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यह आप किसके लिए कह रहे हैं भाई?
भावार्थ समझाइये। -
कवि जिसे चाह कर भी अपना नहीं बना सके और दूसरा चाह कर भी कवि का न हो सके तो चिंतित संवेदना खुद पर ही हावी होकर जितना साथ निभा सके कविता से ही साथ देने की प्रतिबद्धता है।
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जी, थैंक्स
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साथ ही बेरोजगारी, निराशा से घिरे आम जन को चिंता न करने और कविता के माध्यम से उसकी आवाज उठाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई है।
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सही कहा आपने
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बहुत सुंदर भाव
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सादर धन्यवाद जी
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Wah
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सादर धन्यवाद जी
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बहुत खूब
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Thank you
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Sundar
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Thanks
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