कितना चले !कितना रुके! ,
हम जिंदगी के सफर में ,
ये कोई नहीं पूछता ,
मगर लोग अक्सर पूछते हैं,
मंजिल के कितने करीब हो!
कितना चले! कितना रुके!
Comments
14 responses to “कितना चले! कितना रुके!”
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बढ़िया
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धन्यवाद जी
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सुंदर प्रस्तुति
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धन्यवाद
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सच कहती हो। सुन्दर अभिव्यक्ति
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Thank you
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यही तो दुनिया की दस्तूर है।
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जी धन्यवाद
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बेहतरीन
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Thank you
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Very nice
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Thank you
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bahut achha vichar h aapka..
chalne ka nam hi he zindgi
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विचारों के समर्थन के लिए हार्दिक धन्यवाद
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