कितने कोरे कागज रंग डाले,
तुम्हारे लिए।
फिर भी ना कह पाए,
जो कहना था….
कितने कोरे कागज….
Comments
18 responses to “कितने कोरे कागज….”
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद गीता मैम
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हमे बताओ हम कह दें…
बहुत प्यार भरी रचना है-

😊 बहुत बहुत आभार
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कोरे जीवन में कोरे कागज ही रहने दो।
कहना मना है क्योंकि यहाँ हर रंग बेरंग है।।-

धन्यवाद सर
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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👌👌
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धन्यवाद सर
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Bahut khud
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Thank you
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बहुत खूब
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Thank you
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बहुत उम्दा
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धन्यवाद
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Bahot sahi
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Thank you so much
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