कितने कोरे कागज….

कितने कोरे कागज रंग डाले,
तुम्हारे लिए।
फिर भी ना कह पाए,
जो कहना था….

Comments

18 responses to “कितने कोरे कागज….”

  1. Geeta kumari

    बहुत ख़ूब

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद गीता मैम

  2. हमे बताओ हम कह दें…
    बहुत प्यार भरी रचना है

    1. Pratima chaudhary

      😊 बहुत बहुत आभार

  3. Praduman Amit

    कोरे जीवन में कोरे कागज ही रहने दो।
    कहना मना है क्योंकि यहाँ हर रंग बेरंग है।।

  4. Deep Patel

    Bahut khud

  5. बहुत उम्दा

  6. Anonymous

    Bahot sahi

Leave a Reply

New Report

Close