कितनी कशिश थी,
उनकी मासूमियत में।
भूल जाते थे सारा जहां।
जो बदल गए अब,
एक तूफान के बाद।
अब न झलक मिलती है,
ना निशान दिखते हैं।..
कितनी कशिश थी..
Comments
22 responses to “कितनी कशिश थी..”
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद मैम
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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लाजवाब डियर
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Thank you
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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धन्यवाद
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दिल को परखो चेहरे को परखे तो क्या परखे।
यही चेहरे ने लाखों को लूटा अब तुम समझे।।-

🙏
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सुंदर
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धन्यवाद सर
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👌👌👌
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धन्यवाद सर
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waw🙏
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Thanks
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बहुत उम्दा
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Thank you
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वाह
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धन्यवाद सर
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Sahi hai
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Thank you
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