3 Comments

  1. किन्नर होना अभिशाप है !!
    यह जाना जन्म पाकर
    जहां भी जाऊं माहौल
    बन जाता है हास्यास्पद
    मैं तो गौरी शंकर का रूप हूं
    हां मैं अर्धनारीश्वर हूं।।

    वाह बहुत खूब मानवता से भरे हैं आप की पंक्तियां हर मनुष्य सामान है वह चाहे मानसिक रूप या शारीरिक रूप से हम से विभिन्न क्यों ना हो हमें हर किसी का आदर करना चाहिए किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए यही सिखाती हुई आपकी रचना सच ही तो है हमारे समाज में ऐसे कुछ लोग हैं जो दूसरों का मजाक उड़ाने का कोई मौका नहीं छोड़ते ऐसे लोगों की सोच पर शर्म आनी चाहिए।।

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