किसी अदीब को हम
हस्तरेखाएं दिखाकर
पूछना चाहेंगे, क्यों की
प्यार ने यूँ बेवफाई।
किसी अदीब को हम
Comments
14 responses to “किसी अदीब को हम”
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हम भी साथ चलेंगे..
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जी जरूर, थैंक्स
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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“हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है सब तकदीरों का….”
“तक़दीर है क्या में क्या जानूं, में आशिक हूं तदबीरों का…”
सबके, अलग अलग दृष्टिकोण…..
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वाह, समीक्षा में कितनी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं, बहुत सारा धन्यवाद है आपको।
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वाह वाह
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सादर धन्यवाद
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सर हमें पता बता देना
हम भी जाकर हाथ दिखाएंगे
कहीं हम पागल तो नहीं
जो रात को सोते नहींबहुत सुंदर लेखनी है आपकी
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क्या बात कही आपने ऋषि जी, धन्यवाद
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वाह वाह
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सादर धन्यवाद जी
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सुन्दर प्रस्तुति
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सादर धन्यवाद जी
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