किसी अदीब को हम

किसी अदीब को हम
हस्तरेखाएं दिखाकर
पूछना चाहेंगे, क्यों की
प्यार ने यूँ बेवफाई।

Comments

14 responses to “किसी अदीब को हम”

  1. हम भी साथ चलेंगे..

    1. जी जरूर, थैंक्स

    1. धन्यवाद जी

  2. Geeta kumari

    “हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है सब तकदीरों का….”

    “तक़दीर है क्या में क्या जानूं, में आशिक हूं तदबीरों का…”

    सबके, अलग अलग दृष्टिकोण…..

    1. वाह, समीक्षा में कितनी सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं, बहुत सारा धन्यवाद है आपको।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  3. Rishi Kumar

    सर हमें पता बता देना
    हम भी जाकर हाथ दिखाएंगे
    कहीं हम पागल तो नहीं
    जो रात को सोते नहीं

    बहुत सुंदर लेखनी है आपकी

    1. Satish Pandey

      क्या बात कही आपने ऋषि जी, धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद जी

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