14 Comments

  1. “हाथों की चंद लकीरों का, ये खेल है सब तकदीरों का….”

    “तक़दीर है क्या में क्या जानूं, में आशिक हूं तदबीरों का…”

    सबके, अलग अलग दृष्टिकोण…..

  2. सर हमें पता बता देना
    हम भी जाकर हाथ दिखाएंगे
    कहीं हम पागल तो नहीं
    जो रात को सोते नहीं

    बहुत सुंदर लेखनी है आपकी

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