किसी को मत गिराया करो

किसी को मत गिराया करो
लंगड़ी देकर,
किसी को मत रोका करो
टंगड़ी दे कर।
दुनिया में तो कैसे कैसे पहलवान हैं,
कमजोर को
मत डराया करो
धमकी देकर।

Comments

11 responses to “किसी को मत गिराया करो”

  1. उत्तम विचारों का सुंदर प्रस्तुतीकरण

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जी

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत खूब

    1. सादर आभार मानुष जी

  3. विचार ठीक हैं पर कलापक्ष
    सुसंगत नहीं है।
    कैसे-कैसे में
    पुनरुक्ति अलंकार का प्रयोग है और
    योजक चिह्न का उपयोग करना चाहिए था।

  4. Indu Pandey

    बहुत खूब, बहुत सुंदर

    1. सादर धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  5. Piyush Joshi

    Bahut khoob

    1. Satish Pandey

      Thanks

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