कुछ टूट सा गया है

ना मुस्कुराएंगे कभी वैसे,
मुस्कुराते थे कभी जैसे
कुछ टूट सा गया है अंदर ,
दिखाई देगा नहीं बाहर से ।।

Comments

8 responses to “कुछ टूट सा गया है”

  1. वाह बहुत खूब, क्या कहने

    1. Thanks for your precious compliment

  2. आपके द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ लाजवाब हैं। मन की टूटन का सहज और सरल तरीके से सुन्दर चित्रण किया गया है।

    1. बहुत बहुत धन्यवाद सर ।भाव समझने के लिए आभार🙏

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. बहुत शुक्रिया आपका भाई जी 🙏

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