कैसे है इतना स्नेह भरा

ओ मेरे जीवन साथी!
तुझमें कितना है स्नेह भरा,
तू इतना बेचैन हो जाती है
यदि हो मुझको दर्द ज़रा।
मुझको ही क्या घर में कोई
छींके भी तो तू व्यथित हुई
झट से काढ़ा ले आती है
कैसे है इतना स्नेह भरा।

Comments

10 responses to “कैसे है इतना स्नेह भरा”

  1. जीवन साथी का संग तो दो आत्माओं का मिलन है जो मन से मन के तारों को जोड़के रखता है। फलतः भावनाओं पर पकड़ तो स्वभाविक है। वैसे भी नारी तो ममता की प्रतिमूर्ति होती है। बहुत खूब

    1. सादर प्रणाम

  2. वाह
    जीवनसाथी की सुंदर
    भावनाओं को उजागर करती हुई रचना

    1. सादर धन्यवाद

  3. Geeta kumari

    जीवन संगिनी की खूबियों का वर्णन करती बहुत सरस कविता

    1. बहुत सारा धन्यवाद गीता जी

  4. Kumar Piyush

    बढ़िया लिखा है

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