स्याह काली रात
किस तरह हो
सितारों से
मतलब की बात,
कुंडली में अंकित
ग्रह नक्षत्र,
दिख रहे आकाश में,
मगर भाग्य है अवकाश में,
फिर भी हूँ आस में,
क्योंकि कोई तो है पास में।
कोई तो है पास
Comments
5 responses to “कोई तो है पास”
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वाह वाह बहुत खूब वाह, रहस्यमयी रचना, बहुत प्रभावशाली तरीके से भावाभिव्यक्ति की है। भाषा की सरलता देखने लायक है। बहुत खूब रचना
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Thank you sir
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बहुत खूब
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बहुत सुंदर रचना है।सरल भाषा में ,लाजवाब अभिव्यक्ति
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बहुत खूब पीयूष जी
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