किस मोड़ पर मंज़िल
कर रही है इन्तज़ार,
क्या पता …
किस राह में हो जाए
दीदार-ए यार
क्या पता…
जीत एक रास्ता है,
हार एक अनुभव
है जीवन का।
कल क्या हो,
किसी को क्या पता…
____✍️गीता
क्या पता ..
Comments
10 responses to “क्या पता ..”
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Nice
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Thanks for your nice compliment .
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वाह
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आभार भाई जी🙏
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किस मोड़ पर मंज़िल
कर रही है इन्तज़ार,
क्या पता …
किस राह में हो जाए
——– बहुत ही सुंदर रचना। उच्चस्तरीय भाव।-
प्रेरक और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी
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सच है गीता जी कल किसने देखा है। किंतु आज को संवारने की कोशिश ज़रूर हमारे हाथों में है।
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धन्यवाद अनु जी
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Umda
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धन्यवाद प्रज्ञा जी
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