क्यों कुछ कहते नहीं।

क्यों कुछ कहते नहीं,
सब गूंगे बहरे बैठे हैं ,
सबके भीतर जलती है आग,
फिर क्यों खामोश बैठे हैं,
खो दिया है सम्मान को ,
अपने भीतर के इंसान को,
तभी तो चुप ही रहते हैं,
होती है वारदातें आंखों के सामने ,
फिर क्यों ,आवाज दबाए रहते हैं।

Comments

16 responses to “क्यों कुछ कहते नहीं।”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सच को कहती बहुत ही सुंदर रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. Geeta kumari

    Nice lines

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Praduman Amit

    बहुत ही सुंदर भाव है।

  4. Pratima chaudhary

    धन्यवाद सर

    1. Pratima chaudhary

      धन्यवाद जी

    1. Pratima chaudhary

      Thank you

  5. Deep

    अतिसुंदर

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