सावन भी आया अमावस भी आई।
रिमझिम फुहार संग पावस भी आई।।
बागों में , खेतों में छाई हरियाली।
हाथों में मेंहदी भी मैंने रचा ली।।
दिल के उपवन ने झूला लगाया।
मन के संदेशा से तुझको बुलाया।।
क्यों न आया बलम हरजाई
मैंने रो रो के रतिया बिताई।।
क्यों न आया बलम हरजाई
Comments
6 responses to “क्यों न आया बलम हरजाई”
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सुंदर रचना…
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धन्यवाद
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nice
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Nice 👏👏
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सुंदर प्रकृति चित्रण
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एक विरहिणी की वेदना को प्रकट करती हुई सुंदर पंक्तियां
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