चीन के चक्कर में पड़ कर
क्यों फुदक रहा नेपाल तू,
भूल गया क्या रिश्ते – नाते
संबंधों का हाल तू।
रोजी-रोटी चली आज तक
जिस भारत की भूमि से
आज उसे ही आँख दिखाता
आखिर क्यों नेपाल तू।
तुझे दूध की मक्खी जैसे
चूस के पटकेगा वो दूर
मदहोशी में कब समझेगा
उस ड्रैगन की चाल तू।
भड़काकर तेरी सत्ता को
भारत के विपरीत किया
हाँक रहा है तुझे चीन
जैसे तू पशु हो पालतू।
पिस जाएगा चक्की के
दो पाटों में मत फंस नेपाल,
हम चाइना को उत्तर देंगे
होगा बस बेहाल तू।
अभी संभल जा, आँख दिखा मत
भारत को तू फ़ालतू,
चीन के चक्कर में पड़ कर
क्यों फुदक रहा नेपाल तू।
————— Dr. Satish Pandey
क्यों फुदक रहा नेपाल तू
Comments
7 responses to “क्यों फुदक रहा नेपाल तू”
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अतिसुंदर रचना
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सादर धन्यवाद शास्त्री जी
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सच में नेपाल बिलकुल ऐसा ही है
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सादर धन्यवाद सुमन जी
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छोटे से नेपाल की छोटी सी सोच
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True
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thanks
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