क्यों वो शख्स …?

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हाथ से मेरे कुछ लकीरें फिसल गई,

पलक झपकी ना थी कि…

पानी की कुछ बुँदे निकल  गई,

एक झपकी मे ही सबकुछ बदल गया,

लाश तो एक गिरी थी …

पर इंसान हर एक बदल गया,

कुछ पलों मे ख्वाबो को छोड़ दिल जम गया,

मन मे है बस एक ही सवाल –

“क्यों वो शख्स बिछड़ गया “?

क्यों वो शख्स बिछड़ गया “?

-सचिन चौधरी (सनसनवाल)

Comments

12 responses to “क्यों वो शख्स …?”

  1. अंकित तिवारी Avatar
    अंकित तिवारी

    waah sachin bhai

    1. सचिन चौधरी Avatar
      सचिन चौधरी

      Thank you अंकित

  2. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    Bahut hi umda friend

    1. सचिन चौधरी Avatar
      सचिन चौधरी

      Thanks

  3. Panna Avatar
    Panna

    anupam kavita

    1. सचिन चौधरी Avatar
      सचिन चौधरी

      Thanks

  4. anupriya Avatar
    anupriya

    beautiful words

    1. सचिन चौधरी Avatar
      सचिन चौधरी

      Thanks

  5. nitu kandera

    बहतरीन

  6. Satish Pandey

    हाथ से मेरे कुछ लकीरें फिसल गई,

    पलक झपकी ना थी कि…

    पानी की कुछ बुँदे निकल गई,
    बहुत सुंदर

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