कड़वा भी पीजिये

कभी-कभी
हमारी बात पर भी गौर कीजिए,
मीठे के साथ- साथ में
कड़वा भी पीजिये।
अंगूर, सेब, आम सब
आम बात है,
पंचरत्न नीम का भी
स्वाद लीजिये।
सूखा पड़े न वक्ष पर
अश्कों से सींचिये,
सही गलत के बीच में
रेखाएं खींचिये।
मीठे में व्याधियां हैं
कड़वे में है दवाई
कड़वे ने आज तक
कई व्याधियां मिटाई।
कड़वे से नफ़रतें हैं
मीठे से प्यार जग को
रक्षक है तन का कड़वा
यह भान है न जग को।
कड़वे वचन भले ही
लगते बुरे हमें हैं,
लेकिन सही दिशाएं
देते वही हमें हैं।
कभी-कभी
हमारी बात पर भी गौर कीजिए,
मीठे के साथ- साथ में
कड़वा भी पीजिये।

Comments

3 responses to “कड़वा भी पीजिये”

  1. राकेश पाठक

    Good

  2. Ekta Gupta

    कड़वे वचन भले ही लगते हमे बुरे हैं
    लेकिन सही दिशाएं देते वही हमें हैं
    अति सुंदर अभिव्यक्ति

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