एक बूढ़ी अम्मा का घर आना हुआ,
बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ,
अम्मा कहती जब से ई मोबाइल आया,
वयस्कों संग बच्चा भी हमसे बात करने से कतराया,
जैसे ही सुबह हुई बच्चों ने बस मोबाइल चलाया,
गलती केवल बच्चों की ही नाहीं ,
मोबाइल तो मां-बाप ने ही बच्चों को पकड़ाया
ई मोबाइल के चक्कर में बच्चा भी सारे संस्कार भुलाया,
जहां हंसी ठिठोली होती थी वहां अब सन्नाटा छाया,
हमका भी कुछो अब याद नहीं, न जाने कब हमने था
बच्चन का कहानियां सुनाया,
कहती अम्मा जब था कीपैड फोन आया,
बड़ा खुश हुआ मेरा मन ,घर बैठे जब सब से बात कर पाया
पर सूना हुआ मेरा आंगन, जब से ई एंड्राइड फोन आया
अम्मा भी चाहें हंसना और बच्चों के संग बतियाना,
हम जानित हैं मोबाइल भी है जरूरी
पर थोड़ा समय साथ में हमहूं चाही बिताना,
अपने बुजुर्गों के संग थोड़ा समय व्यतीत करें
ताकि हम बुजुर्ग भी खुशहाल रहें,
बस बूढी अम्मा ने आप सबको यही संदेशा भिजवाया है।
_____✍️____ एकता गुप्ता
एक बूढ़ी अम्मा का आग्रह
Comments
10 responses to “एक बूढ़ी अम्मा का आग्रह”
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पर सूना हुआ यह आंगन जब से एंड्रॉयड फोन आया,
दिल छू जाने वाली रचना।-

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद अमिता जी
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Very nice dear bhut hi axa likha h
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आपका सादर अभिनन्दन अंजली जी
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Bhut axa lga meri friend itna axa likhti h
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संवाद हीनता का यथार्थ चित्रण
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एक बूढ़ी अम्मा का घर आना हुआ,
बातों का सिलसिला जब शुरू हुआ,
अम्मा कहती जब से ई मोबाइल आया,
वयस्कों संग बच्चा भी हमसे बात करने से कतराया,
——– आम जीवन में प्रविष्ट कर चुके मोबाईल के विषय में बहुत सुंदर पंक्तियाँ लिखी हैं आपने। यह यथार्थपरक रचना बहुत ही सुन्दर है।-

आपका सादर अभिनन्दन सतीश जी 🙏🏻🙏🏻
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अतिसुंदर भाव
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मोबाइल के सदुपयोग और दुरुपयोग का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती सुंदर रचना
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