अपने खामोश लबों को कुछ शरारत तो दे दो।
मुझे बात करने की थोड़ी इजाजत तो दे दो।।
खामोश लब
Comments
5 responses to “खामोश लब”
-
👏👏
-

सुन्दर
-

वाह क्या बात है
-
बहुत ही उम्दा रचना दो लाइनों में बहुत कुछ कह दिया है शास्त्री जी आपने
-

बहुत सुंदर पंक्तियां
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.