खामोश लब

अपने खामोश लबों को कुछ शरारत तो दे दो।
मुझे बात करने की थोड़ी इजाजत तो दे दो।।

Comments

5 responses to “खामोश लब”

  1. Vasundra singh Avatar

    वाह क्या बात है

  2. बहुत ही उम्दा रचना दो लाइनों में बहुत कुछ कह दिया है शास्त्री जी आपने

  3. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर पंक्तियां

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