खारा सोना

एक आँधी सी छाई चहुदिश
बन दुश्मन द्वार कोरोना है।
लाशें रो रही आज सड़क पर
पीड़ित धरती का हर कोना है ।।
विनयचंद एकांत में ले चल
बीच भीड़ में क्योंकर रोना है।
राम नाम नित रट री रसना
है औषधि सच्चा खारा सोना है ।।

Comments

9 responses to “खारा सोना”

  1. राकेश पाठक

    Nice

  2. Ekta Gupta

    बहुत सुंदर पंक्तियां

  3. वाह वाह, बहुत खूब

  4. vikash kumar

    लाशें रो रही आज सड़क पर
    पीड़ित धरती का हर कोना है ।।

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