देख के खेतों की हरियाली,
नव-प्रभात ऊषा की लाली
मन विभोर हो उठा है मेरा,
मन मचले मत जा यहां से
कितना सुन्दर गांव है मेरा
पीली-पीली ओढ़ ओढ़नी,
सरसों खड़ी मुस्काए
मीठे गन्ने की पत्ती लहराकर,
अपनी ओर बुलाए
शुद्ध पवन है, ना कोई शोर
कोयल कूके मेरे खेत में,
नृत्य कर रहे हैं मोर
तस्वीर बसा ली आंखों में,
मैंने मेरे गांव की
खेतों की हरियाली की
और उस नीम की छांव की
*****✍️गीता
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