10 Comments

  1. खोज रहा है आदमी, अपने को ही आज,
    मगर नहीं हो पा रहा, होने का अहसास,
    _______जीवन दर्शन के प्रति गहरी अनुभूति दर्शाती हुई, कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ एवम् उम्दा रचना।बहुत सुंदर शिल्प और अभिव्यक्ति

Leave a Reply