ख्वाहिशों के बाजार

ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं
कुछ खरीदने की खातिर
मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के
कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर

Comments

12 responses to “ख्वाहिशों के बाजार”

  1. Praduman Amit

    ख्वाहिश के बाजार में ख़्वाहिश के दौलत ही आपको निराश नहीं करेगी। पंक्तियां अच्छी है।

    1. Abhishek kumar

      👍

  2. Satish Pandey

    सुन्दर पंक्तियाँ,

  3. की कल्पना अपना बहुत ही सुंदर है

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