ख्वाहिशों के बाजार में आयी हूं
कुछ खरीदने की खातिर
मगर दाम ही इतने है हर ख्वाहिश के
कि खाली हाथ ही वापस चली, बन मुसाफ़िर
ख्वाहिशों के बाजार
Comments
12 responses to “ख्वाहिशों के बाजार”
-

ख्वाहिश के बाजार में ख़्वाहिश के दौलत ही आपको निराश नहीं करेगी। पंक्तियां अच्छी है।
-

thanks
-
-

👌
-

thanks
-

thanks
-
-

वाह
-
हैं। वाह
-

thanks
-
👍
-
-
सुन्दर पंक्तियाँ,
-

thanks
-
-
की कल्पना अपना बहुत ही सुंदर है
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.