10 Comments

      1. आपकी टिप्पणी मुझे बेहतर करने को प्रेरित करती है ।
        सच में सावन ने एक मंच दिया, जहाँ हम अकेले नहीं ।
        हमारी जैसी सोंच रखनेवाले लोगों से एक अलग -सा जुङाव महसुस करते हैं ।आपकी एक कविता इसी भाव को समर्पित थी।

  1. भूमि है नानक पैगंबर रामकृष्ण मनभावन की कितनी सुंदर लाइन है और बेहद सुंदर शब्दों की रचना भारत की अलौकिक छटा को दर्शाती हुईं 👏👏👏👏👏👏

    1. प्रियाजी सादर आभार ।
      आपको पंक्तियाँ पसंद आई, आपने चिन्हित भी किया, इसके लिए सच में मैं आभारी हूँ आपकी ।

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