गमों की बात ही न कर

गमों की बात ही न कर
तू मेरे आगे,
मुझे गम की नहीं
उत्साह की जरूरत है।
तेरी गलियों में आया
चाह लेकर,
मुझे बस
प्यार की जरूरत है।

Comments

14 responses to “गमों की बात ही न कर”

  1. वाह वाह, गजब लिखा है,

  2. वास्तव में आपकी लेखनी में भरपूर साहित्य है।

    1. आपका हार्दिक धन्यवाद

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    सुन्दर प्रस्तुति

    1. सादर धन्यवाद सर

  4. Prayag Dharmani

    सुंदर रचना

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. सादर धन्यवाद जी

    1. Satish Pandey

      Thanks

  5. Geeta kumari

    Nice lines

    1. Satish Pandey

      Thank you

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