गरमी

ये गरमी कैसी जेठ की ,
चिल चिल करती धूप।
ठंढी मीठी छांव में,
क्या परजा क्या भूप।।

Comments

6 responses to “गरमी”

  1. Divya Avatar

    बहुत खूब 

      1. शानदार प्रस्तुति

  2. सुन्दर पंक्तियां

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