हर रोज़ मन की गहराइयों में सिमट जाता है कोई,
आकर अपनी ही परछाइयों से लिपट जाता है कोई।।
राही अंजाना
गहराई
Comments
17 responses to “गहराई”
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Bahut khoob bhai
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वाह
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10x
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nice
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10x
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बहुत खूब
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10x
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🤐
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10x
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Nice
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10x
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Nice
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धन्य
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Waah
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वाह
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ढNयवाद
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Good
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