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  1. कवि गीता जी की लेखनी से उदभूत अति उत्तम रचना है यह। कवि की बारीकी नजर जीवन के किसी भी कोने से अछूती नहीं रही है। कवि की नजर सूक्ष्मातिसूक्ष्म संवेदना को समेटती हुई जीवन से जुड़ गई है। वाह

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