वो मुझसे यूं बोले,
तुम बहुत प्यारी हो
तुम सबसे न्यारी हो
कभी-कभी कलेजा जलाती हो,
फिर भी मुझे बहुत भाती हो
लिखती रहती हो कविताएं तुम,
इतना सब कैसे कर पाती हो
कभी-कभी क्रोधित होती हो,
कभी बरसाती हो नेह मुझ पर
कभी बात करती हो प्यार से,
कभी-कभी बहुत सताती हो
गीता हो तुम गीत गाती जाती हो
_____✍️गीता
गीत
Comments
8 responses to “गीत”
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एकदम सत्य और खूबसूरत पंक्तियां
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बहुत सारा धन्यवाद प्रज्ञा
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वाह,वाह बहुत सुन्दर
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Thanks Deepa ji
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क्या बात है, लाजवाब
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Thank you seema
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बहुत खूब
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आपका बहुत बहुत शुक्रिया भाई जी
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