गीत

रिमझिम बरसे सावन सजना।
झूले लगे हैं मोरे अंगना।।
सब सखियों के आए सजना।
क्यों है सूना मेरा अंगना।।
आजा अंगना के भाग जगा दे।
बमल मोहे झूला झूला दे़……बलम मोहे झूला झूलादे।।
लहगा चुनरी ले के आऊँ।
हरी चुड़ियाँ साथ में लाऊँ।।
हाथों में मेंहदी लगा के रखना।
सनम आऊँगा मैं तेरे अंगना।।
सारे लाज शरम तू भगा दे…. सनम मोहे झूला झूला दे।।

Comments

4 responses to “गीत”

  1. Priya Choudhary

    Sundar Rachna

  2. Geeta kumari

    अति सुंदर..

  3. Satish Pandey

    रिमझिम बरसते सावन में मिलन की उत्कंठा की संवेदना प्रस्फुटित हुई है, श्रृंगार रस की प्रधानता है. वाह

  4. सावन की सबसे सुंदर कविता इससे ज्यादा मेरे पास शब्द नहीं है प्रशंसा के लिए

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