हे गुरुवर गुणशील आगारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।।
तेरी कृपा ने चलना सिखाया।
जीवन के अंधकार मिटाया।।
अग जग में किया उजियारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। १।।
शिव विरंचि नारायण तुझ में।
शब्द ब्रह्म श्रुति गायन तुझ में।।
करू दर्शन पूजन मेरे प्राणाधारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। २।।
कर उपदेश इहलोक सँवारा।
दे धर्मराह परलोक सुधारा ।।
जनम जनम ये ‘विनयचंद ‘
माँगे साथ तुम्हारा।
चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। ३।।
गुरु वंदन
Comments
5 responses to “गुरु वंदन”
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बहुत खूब
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बहुत सुंदर सृजन
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गुरु पूर्णिमा की बधाई
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सुंदर शब्दों का समन्वय
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Bahut sunder.
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