“गुलाम हूँ अपने संस्कारों की”….

🌹🌹🌹🌹
गूँगी नहीं हूँ मैं
मुझे भी बोलना आता है।
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गुलाम हूँ अपने संस्कारों की
वर्ना मुझे भी सबक सिखाना आता है।

Comments

9 responses to ““गुलाम हूँ अपने संस्कारों की”….”

    1. धन्यवाद आपका

  1. Master sahab

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    1. Pragya Shukla

      🙏🙏

  2. बहुत सुन्दर रचना

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