घरोंदा

उड़ने नहीं दोगे आज तो कल उड़ना भूल जाएंगे,
परिंदे अपनी ही शाख से मिल जुलना भूल जाएंगे,

घर बनाने के हुनर के साथ जो पैदा हुए हैं बन्दे,
गर पिंजरे में बन्द रहे तो घरोंदा बुनना भूल जाएगे।।

राही अंजाना

Comments

20 responses to “घरोंदा”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Nice

  2. क्या बात है

  3. Pragya Shukla

    वाह

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