घात

मेरी मुहब्बत को उसने
भरी महफिल में तमाशा बना दिया।
मैने जब दी उसे तोहफ़ा,
तब उसने ज़हरीली मुस्कान लेती हुई
मेरे मुंह पे फेंक दिया।।

Comments

12 responses to “घात”

  1. बेहद संजीदा

    1. Hello pragya, please don’t mind, what did you felt”great”in this act. please don’t take it other wise

      1. जी मैम ग्रेट मैंने
        कविता को नहीं कवि को बोला है..

    2. लेकिन यहां कविताओं की समीक्षा होती है ।

      1. पता नहीं था दीदी
        हा हा हा

      2. वैसे थैंक्यू दी अच्छा लगा
        ऐसे ही मार्गदर्शन करती रहें

    3. Geeta kumari

      🙂🙂

  2. बहुत सुंदर

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