घुल गया उनका अक्स

घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे
आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा

हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर
निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा

हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवर
न वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा

भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दिया
किस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा

तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करता
दिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार रहा

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1. ताबिश : चमक
2. बज़्म= सभा

Comments

3 responses to “घुल गया उनका अक्स”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Satish Pandey

    वाह वाह

  3. Satish Pandey

    बहुत सुंदर

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