कविता – घोड़ा दबा दे सिपाही
तीखी नजर से सिपाही
आज ऐसा निशाना लगा दे,
मार दे देश के दुश्मनों को
उनका नामोनिशां तू मिटा दे।
तूने सीमा में डटकर हमेशा
दुश्मनों के छुड़ाये हैं छक्के,
आज गलवान घाटी में तूने
दुश्मनों को लगाये हैं मुक्के।
तेरे मुक्के से दुश्मन पिटेगा
तेरी गोली से दुश्मन मरेगा,
हिन्द की जय हो जय हो हमेशा
तेरी बन्दूक का स्वर कहेगा।
तेरी नजर लक्ष्य पर है
सामने फौज दुश्मन खड़ी है,
अब तू घोड़ा दबा दे सिपाही
देश की आस तुझ पर टिकी है।
मार गोली उन्हें अब उड़ा दे
देश के दुश्मनों को उड़ा दे,
तू निडर वीर भारत का बेटा
अब सबक दुश्मनों को सिखा दे।
—- डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय,
पीएचडी, राजकीय फार्मा0 चम्पावत
उत्तराखंड। मो0 9536370020
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