9 Comments

    1. मेरी रचना को अपना कीमती समय देने के लिए और समीक्षा करने के लिए, हृदय की गहराइयों से ,बहुत-बहुत आभार एवं बहुत-बहुत धन्यवाद

  1. संयोग श्रृंगार की यादों को ताजा करती पंक्तियाँ कविता की पूर्णता पर वियोग से ही जूझते रहने का अहसास करा रही हैं, तद्भव, तत्सम एवं अरबी-फ़ारसी शब्दों का का सुंदर तालमेल है. वाह

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