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  1. फर्ज निभाकर अब कर्ज चुकाने की चिंता,
    बुढ़ापे तक कोल्हू में फंसे रहने की चिंता।
    बच्चों के होते अकेले पड़ जाने की चिंता,
    मरने तक बच्चों के वापिस आने की चिंता।।
    —– सुन्दर पंक्तियां, सच्चे भाव। मानव जीवन के निरंतर चिंता में रहने के सच्चे भावों की सच्ची प्रस्तुति हुई है। कविता में जीवन दर्शन है। भाव व शिल्प का बेहतरीन तालमेल है।

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