नेपाल !! तू मेरा मित्र रहा है,
चीन के बहकावे में न आ,
वह तुझे शून्य करवा देगा,
तेरा अस्तित्व मिटा देगा।
अब तक इतिहास में यही दर्ज है
नहीं रहा तू गुलाम कभी,
अब ड्रैगन के चंगुल में आकर
गुलामी करता है उसकी।
भूख मिटाने का लालच
देकर तेरी संप्रभुता को
लूट रहा है धीरे- धीरे
तू
समझ न पाया ड्रैगन को।
सब कुछ तेरा ही बिगड़ेगा
भारत का कुछ नहीं बिगड़ेगा,
तेरे कंधे पर रख बंदूक
यदि ड्रैगन आँख दिखायेगा
भारत की ताकतवर सेना से
तू कैसे बच पायेगा।
इसलिए गुलामी छोड़ अभी
अपने कंधे को बचा मित्र
उस ड्रैगन के बहकावे में
अपने को मत मिटा मित्र।
—— Dr. Satish Pandey
चीन के बहकावे में न आ
Comments
8 responses to “चीन के बहकावे में न आ”
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बहकते नेपाल को सावन का संदेश
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Thank you
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बहुत ही उम्दा संदेश
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हार्दिक आभार
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बहुत ही सुन्दर
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धन्यवाद ji
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कोई मित्र नहीं है सब आस्तीन के सांप हैं
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सही कह रहे हैं आप
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