चैत्र मास

कविता -चैत्र मास
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शिक्षा समाज देश के सजग प्रहरी,
मौन धारण कर के बैठे हो,
बिगड़ रही नव पीढ़ी अपनी
चुप्पी तोड़ो आवाज उठाओ,
बच्चों को इतिहास बताओ,
पता आपको यह त्यौहार नहीं अपना है,
हर हिन्दू का नववर्ष चैत्र मास है,
जो काम मेरा है कर रहा हूं,
गूंगो के शहर में गा रहा हूं,
बने अशिक्षित आज के दिन सब,
गूंगे बहरे हो जाते चैत्र मास में सब,
क्यों प्रथा रीति औरों की अपनाएं,
क्यो अंग्रेजी नववर्ष वर्ष मनाएं,
भूले माँ भारती का हर बेटा
भूल न सकता दिनकर बेटा
एक जनवरी नही है नववर्ष हमारा
कहें ‘ऋषि’ चैत्र मास है नववर्ष हमारा।
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** ✍ऋषि कुमार प्रभाकर-

Comments

5 responses to “चैत्र मास”

  1. बहुत ही सटीक व सुंदर रचना हमेशा की तरह नवीनता का समावेश

  2. Geeta kumari

    सही कहा ऋषि जी लेकिन समय के साथ चलना पड़ता है ।
    नव वर्ष की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

  3. This comment is currently unavailable

  4. वाह वाह, ऋषि जी, बहुत खूब

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