छह मास हो गए

छह मास हो गए
पिताजी को गए,
छठा मासिक श्राद्ध भी
आज हो गया,
दिन बीतते से जा रहे हैं,
सब कुछ कहीं
खो गया।
जाने कहाँ
चले जाती है आत्मा,
कहाँ विलीन हो जाती है,
आत्मा,
क्या उसके बाद भी कुछ सच है
या वही अंतिम पथ है,
जो भी है
कुछ तो है।
जहां भी गई वो
पवित्र आत्मा
वहां सुखी रहे,
हमारे ऊपर
अपनी कृपा दृष्टि
रखी रहे।

Comments

8 responses to “छह मास हो गए”

  1. मोहन सिंह मानुष Avatar

    अभिधा शब्द शक्ति, भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति

    1. सादर अभिवादन, धन्यवाद

  2. Devi Kamla

    मार्मिक

    1. Satish Pandey

      आभार

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