आज कैसे – कैसे हुए जज़्बात के रोना आया,
बीती किसी बात पे रोना आया।
एक दुखती रग है, गर दबा देता है कोई,
नहीं मिलती उस दर्द से निजात पे रोना आया…
जज़्बात
Comments
18 responses to “जज़्बात”
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मन के भीतर बसे दर्द पर सुन्दर पंक्तियाँ लिखी हैं, सरल व सहज तरीके से दी गयी यह एक बेहतरीन प्रस्तुति है। keep it up
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Thanks for your pricious complement.
It is really great n energetic
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बहुत ही उम्दा
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शुक्रिया जी
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बहुत सुंदर👏👏
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Thank you mam
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सुन्दर अभिव
सुन्दर प्रस्तुति
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बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏
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Very nice
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Thank you very much Isha ji .
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Nice Lines
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Thank you very much
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Sunder
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बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏
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बहुत खूब
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Thankyou ji🙏
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बहुत ही उम्दा
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आभार सहित धन्यवाद पीयूष जी
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