तेरे कांधे पर, सर रख सोना चाहता हूँ।
तेरे आगोश में, सब कुछ खोना चाहता हूँ।
जन्नत सुना था, तेरी बाँहों में देख भी लिया,
दो जिस्म और एक जान होना चाहता हूँ।
जन्नत
Comments
9 responses to “जन्नत”
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वाह बहुत सुन्दर
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धन्यवाद
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Bahut khub
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Good
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