जमाना तमाशबीन..!!

लब खामोश हों फिर भी
बहुत कुछ कह जाते हैं
आँखें नम हों फिर भी
हम मुस्कुरा जाते हैं
कोई नहीं समझता
तन्हा दिल के गमों को
चीखकर आह निकले तो
जमाना तमाशबीन ही समझता है…

Comments

8 responses to “जमाना तमाशबीन..!!”

    1. धन्यवाद आपका

  1. Geeta kumari

    “लब खामोश हों फिर भी बहुत कुछ कह जाते हैं”
    हृदय स्पर्शी रचना , बहुत सुंदर

    1. Thank u soooooo much sister……..

  2. मन की भीतरी परतों से जुड़ी संवेदना को बहुत सुंदर स्वरूप में उकेरा गया है। कथ्य में गहराई और शिल्प में सरलता का समावेश है। भावपूर्ण रचना

    1. धन्यवाद भाई
      सुंदर और सटीक समीक्षा करके मेरा हौसला बढा़ने के लिए

  3. Sandeep Kala

    मन के भावों को दर्शाती सुन्दर पंक्तियां

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