जब कोई जरिया मिलता नहीं
ग़म छिपाने का।
हमराज दिखता नहीं
दर्द मिटाने का।
बेचैनी हद से ज्यादा आसरा नहीं
तकल्लुफ मिटाने का।
बरबस मन की पीर अश्क बन छलक आती,
है सौख नहीं आंसू दिखा,सहानुभूति पाने का।
जरिया नहीं दर्द मिटाने का
Comments
13 responses to “जरिया नहीं दर्द मिटाने का”
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कवि सुमन जी की कविता में मन के भावों का बहुत ही सुन्दर और सहज तरीके से चित्रण किया है। भाव पर कवि की बहुत सुन्दर पकड़ है। वाह
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सादर धन्यवाद सर
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Very nice poem
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A lot of thanks
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Sadar avar
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Bahut khoob
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अतिसुंदर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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बहुत ही सुन्दर भाव में अपनी कविता को आपने अंजाम दिया है।
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सादर आभार सर
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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सादर आभार
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सुन्दर रचना
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