जरिया नहीं दर्द मिटाने का

जब कोई जरिया मिलता नहीं
ग़म छिपाने का।
हमराज दिखता नहीं
दर्द मिटाने का।
बेचैनी हद से ज्यादा आसरा नहीं
तकल्लुफ मिटाने का।
बरबस मन की पीर अश्क बन छलक आती,
है सौख नहीं आंसू दिखा,सहानुभूति पाने का।

Comments

13 responses to “जरिया नहीं दर्द मिटाने का”

  1. Satish Chandra Pandey

    कवि सुमन जी की कविता में मन के भावों का बहुत ही सुन्दर और सहज तरीके से चित्रण किया है। भाव पर कवि की बहुत सुन्दर पकड़ है। वाह

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद सर

    1. Suman Kumari

      A lot of thanks

      1. Suman Kumari

        Sadar avar

  2. अतिसुंदर रचना 

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

  3. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव में अपनी कविता को आपने अंजाम दिया है।

    1. Suman Kumari

      सादर आभार सर

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  5. सुन्दर रचना 

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